प्रश्न उठा.. कि राम कौन है...रावण कौन है... ये निष्कर्ष निकला की..असल में ये दोनों हमारे अंदर ही हैं...जब मैं ऐसा सोचने लगी तब मुझे लगा की स्प्लिट पर्सनालिटी टाइप का कुछ फील कर रही हूँ..वैसे तो मैं ना ही राम हूँ ना ही रावण,सीता भी नहीं... मैं तो सिर्फ़ मैं हूँ.और ये प्रश्न सिर्फ दशहरा दिवाली तक ही तो पूछे जाएंगे..फिर सब अपनी डफ़ली अपना राग...फिर वही राम रहीम का न्यूज़ और भविष्य में श्री लंका के साथ मैच...हाँ इस बीच बनारस के लंका में भी काफी हंगामा हुआ है...तो उसकी खबर भी ली जाएगी...मैं ज्यादा दिमाग नहीं लगाती...होंगे कोई राम होगा कोई रावण..दस सर किसके होते हैं...मुझे अकल्पनीय लगता है..हाँ एक इंसान के दस तरह के विचार ज़रूर हो सकते हैं.....राम होंगे अच्छे इंसान..पर मैं उन्हें अपना आदर्श क्यों मानूं..मैं उन्हें पूजूँ क्यूँ...एक अन्य धर्म के इंसान के लिए राम कौन है... कोई भी नहीं.शायद सिर्फ एक पात्र एक कहानी के..दुर्गा कौन हैं..एक स्त्री जिनकी सब पूजा करते हैं उनसे डरते हैं, पूजा के बाद नदी में बहा देते हैं..वो मूर्ति जिसको आपने इतना मान सम्मान दिया वो बह कर किस नाले में चली गयी आपको पता भी नहीं चला..या शायद चला..पर क्या फर्क पड़ता है..९ दिन तो हमने पूजा कर ली न..माँ खुश हो गयी होंगी...अब तो दिवाली आ रही है..बहुत सी खरीदारी करनी है..घर सजाना है..लाइट्स खरीदनी हैं...बस हो गयी प्रिऑरिटीज़ चेंज....क्या हैं ये त्यौहार..क्यों मना रहे हैं लोग हज़ारो सालों से..क्यों सामान खरीदने पर इतना ज़ोर दिया जाता है.क्यों परिवार से मिलने जुलने पर ज़ोर दिया जाता है..... बहुत से सवाल हैं मेरे मन में...बहुत के जवाब खुद ही मिल जाते हैं..कुछ सवालों को सवाल रहने देना ही अच्छा है...वो भ्रम अगर टूट जायेगा तो बहुत तकलीफ होगी..हाँ त्यौहारों का एक फ़ायदा मुझे ज़रूर दिखता है कि इंसान इसी बहाने अपने प्रियजनों को याद करता है...कई बार गिले शिकवे भी भुला देता है...बच्चों को खेलने और घूमने का एक बहाना मिल जाता है,महिलाओं को घर की सफ़ाई ,नये कपड़े गहनों का बहाना,पुरुषों को आराम और स्वादिष्ट खाने का बहाना ..हो सकता है यही कारण रहा हो..पूर्वजों द्वारा त्योहारों की रचना करने का..पता नहीं,एक सवाल ये भी है..पर त्योहार अच्छे हैं...कारण कुछ भी हो..हमें तो खुशी देतें ही हैं साथ ही हम सबकी खुशी चाहने लगते हैं...
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत् ।।