Wednesday, 4 October 2017

राम कहानी

  प्रश्न उठा.. कि राम कौन है...रावण कौन है... ये निष्कर्ष निकला की..असल में ये दोनों हमारे अंदर ही हैं...जब मैं ऐसा सोचने लगी तब मुझे लगा की स्प्लिट पर्सनालिटी टाइप का कुछ फील कर रही हूँ..वैसे तो मैं ना ही राम हूँ ना ही रावण,सीता भी नहीं... मैं तो सिर्फ़ मैं हूँ.और ये प्रश्न सिर्फ दशहरा दिवाली तक ही तो पूछे जाएंगे..फिर सब अपनी डफ़ली अपना राग...फिर वही राम रहीम का न्यूज़ और भविष्य में श्री लंका के साथ मैच...हाँ इस बीच बनारस के लंका में भी काफी हंगामा हुआ है...तो उसकी खबर भी ली जाएगी...मैं ज्यादा दिमाग नहीं लगाती...होंगे कोई राम होगा कोई रावण..दस सर किसके होते हैं...मुझे अकल्पनीय लगता है..हाँ एक इंसान के दस तरह के विचार ज़रूर हो सकते हैं.....राम होंगे अच्छे इंसान..पर मैं उन्हें अपना आदर्श क्यों मानूं..मैं उन्हें पूजूँ क्यूँ...एक अन्य धर्म के इंसान के लिए राम कौन है... कोई भी नहीं.शायद सिर्फ एक पात्र एक कहानी के..दुर्गा कौन हैं..एक स्त्री जिनकी सब पूजा करते हैं उनसे डरते हैं, पूजा के बाद नदी में बहा देते हैं..वो मूर्ति जिसको आपने इतना मान सम्मान दिया वो बह कर किस नाले में चली गयी आपको पता भी नहीं चला..या शायद चला..पर क्या फर्क पड़ता है..९ दिन तो हमने पूजा कर ली न..माँ खुश हो गयी होंगी...अब तो दिवाली आ रही है..बहुत सी खरीदारी करनी है..घर सजाना है..लाइट्स खरीदनी हैं...बस हो गयी प्रिऑरिटीज़ चेंज....क्या हैं ये त्यौहार..क्यों मना रहे हैं लोग हज़ारो सालों से..क्यों सामान खरीदने पर इतना ज़ोर दिया जाता है.क्यों परिवार से मिलने जुलने पर ज़ोर दिया जाता है..... बहुत से सवाल हैं मेरे मन में...बहुत के जवाब खुद ही मिल जाते हैं..कुछ सवालों को सवाल रहने देना ही अच्छा है...वो भ्रम अगर टूट जायेगा तो बहुत तकलीफ होगी..हाँ त्यौहारों का एक फ़ायदा मुझे ज़रूर दिखता है कि इंसान इसी बहाने अपने प्रियजनों को याद करता है...कई बार गिले शिकवे भी भुला देता है...बच्चों को खेलने और घूमने का एक बहाना मिल जाता है,महिलाओं को घर की सफ़ाई ,नये कपड़े गहनों का बहाना,पुरुषों को आराम और स्वादिष्ट खाने का बहाना ..हो सकता है यही कारण रहा हो..पूर्वजों द्वारा त्योहारों की रचना करने का..पता नहीं,एक सवाल ये भी है..पर त्योहार अच्छे हैं...कारण कुछ भी हो..हमें तो खुशी देतें ही हैं साथ ही हम सबकी खुशी चाहने लगते हैं...

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत् ।।

सेल्फ़ी युग

हाँ मैं सुंदर हूँ...ये तीन शब्द हर कोई अपने आप को कहना चाहता है...और खुद को हम कितना महत्व देते हैं..वो इस बात से पता चलता की ग्रुप फोटो में हम सबसे पहले.अपने आप को देखते हैं.. अगर हमारी पिक अच्छी आयी है तो हम कहते हैं अच्छी फ़ोटो है...नहीं तो हम कहते हैं की कितनी बेकार फ़ोटो है..और सेल्फी का चलन जबसे चला है तब से लोगो ने मुँह टेढ़ा करना शुरू कर दिया है...अपने होठों को गोल कर के पिक खींचने वाली लड़कियां मतलब कभी तो अपने आप को ग़ौर से देखो तुम कितनी अजीब लगती हो ऐसी शक्ल बना कर.. भगवान से डरो.. अच्छी खा़सी शक्ल को तुमने कब गुलेल जैसा बना लिया तुम्हे पता भी नहीं चला..मुझे लगता है लोग अपनी शक्ल शायद इसलिए टेढ़ी करते हैं की वो कैमरा में दुबले लगे..और कोई कारण तो मुझे नहीं समझ आता..भला करे ऊपर वाला उनका।
ऊपर वाले से याद आया बुद्ध द्वारा कही गयी ये पंक्ति "आत्म दीपो भव:"...क्या मुश्किल है इस काम को करना.. कि हम स्वयं अपने दीपक बन जाये..हम तो सिर्फ अपना आइना ही बने हुए हैं इस सेल्फी के युग में..और अगर हम अँधेरे में हैं तो हमारा आइना भी हमें अँधेरा ही दिखाएगा...अपने आप को दिया बना लेने का क्या उपाय है... कि हम अपनी ही रौशनी में आगे बढ़ जाएँ..किसी और के मोहताज़ न रहें...वैसे बातें बहुत होती हैं व्हाट्सप्प पर...कोई एक इंसान हाथ खड़ा करे जिसने अपने अंदर के रावण को मार लिया है...आपको अपने आप में कोई बुराई दिखेगी तब तो आप उसे ख़त्म करोगे न.. मुझे बस एक बात समझ आती है की आपको रोज़ बढ़ना चाहिए...तन से नहीं मन से..बुद्धि से..ज्यादा नहीं तो चुटकी भर...क्यूँकि एक चुटकी बढ़त की कीमत बहुत है व्हाट्सप्प बाबू

Facebookऔर जिंदगी

क्या आपने कभी फेसबुक के किसी पेज के कमेंट्स सेक्शन को पढ़ा है..सच में बहुत मज़ा आता है...एक पिक पोस्ट कर दो..फिर देखो कितने तरह के लोग होते हैं दुनिया में....एक पेशेंट बच्चा...नाक में नली डाल कर बोल रहा है आमीन बोलने..सभी लोग आमीन बोलते हैं... आमीन का मतलब पता हो या न हो..५ साल पहले ही वो बच्चा..जो की किसी नॉन सीरियस बीमारी से पीड़ित था.. ठीक हो गया पर आमीन का सिलसिला अब तक चल रहा है....७ लाख लाइक्स २ लाख कमेंट्स..सोचती हूँ कौन हैं ये लोग,कहाँ से आते हैं....दुर्गा माँ की पिक के नीचे 'जय माता दी' लिखने वाले...दुर्गा माँ ने ज़रूर देख लिया होगा..आप पर बस अब कृपा बरसने ही वाली है....किसी छोटी सी लड़की की तस्वीर..ये लिखा होता है आप मुझे बर्थडे विश नहीं करोगे..और बस लोग इमोशनल हो कर विश करने लग जाते हैं...चाहे उसका बर्थडे हो या न हो..उसकी प्रोफाइल भी ओरिजिनल हो या न हो...भारतीय सेना का तो बाका़यदा पेज है..पता नहीं किसने बनाया है...इंडो -पाकिस्तान वॉर की झलक देखनी है तो वह ज़रूर जाएँ..लोगो के खून में दौड़ती देश भक्ति देखें और आनंद ले..एक और प्रकार के लोग होते हैं...जादू देखने के इच्छुक ..नंबर ३ लिखिए और जादू देखिये ..इस पर तो मैंने बड़े बड़े सूरमाओं को कमेंट करते देखा है...पूछना चाहती हूँ कि आपको जादू दिख या नहीं..शायद हर कोई इस वर्चुअल दुनिया में एक जादू के तलाश में ही भटक रहा है...की एक चमत्कार हो जाये और हमारी सारी समस्याएं ख़त्म हो जाएँ...पर समस्या ये है की इस समस्या का कोई अंत नहीं है....ज़िन्दगी तो ज़िंदादिली से जीते जाने का नाम है..हाँ इस तेज़ी से दौड़ती दुनिया में आपको अपने लिए और सिर्फ अपने लिए टाइम ज़रूर निकालना चाहिए...दिन का एक छोटा हिस्सा सिर्फ आपके लिए... ज़िन्दगी बहुत बेहतर लगने लगेगी.